खुली लाटरी, मच गया घर भर में कोहराम। मंगल का दिन था, मगर लगे खनकने जाम। लगे खनकने जाम, पिता को ऐतराज था, बोले दुष्टो इस दिन तो व्रत का रिवाज था। कहा पुत्र ने कौन आपको समझाएगा, बिन मय मंगल क्या मंगलमय कहलाएगा? -कृष्ण गोपाल विद्यार्थी
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