बहादुरगढ़ आज तक, विनोद कुमार
पिछले दिनों स्ट्रे कैटल फ्र्री अभियान के तहत झज्जर जिले में तेजी से बेसहारा गोवंश को जिले की विभिन्न गोशालाओं में भेजने का अभियान चला। प्रशासन द्वारा अधूरी तैयारी से ही इस अभियान को चला दिया गया। जिन गोशालाओं में इन बेसहारा गोवंशों को भेजा जाना था, उनमें से अधिकतर में पहले ही क्षमता से अधिक गोवंश था। उन गोशालाओं के प्रतिनिधि पहले से रखे गोवंश के लिए चारे व शेड के लिए सरकार से आर्थिक मदद की कई बार गुहार लगा चुके थे। क्योकि झज्जर की इन गोशालाओं में गोवंश की संख्या क्षमता से अधिक थी। इसके बावजूद भी प्रशासन ने इन गोशालाओं में बिना शेड व चारे पानी की व्यवस्था किए बेसहारा गोवंश को भेज दिया। प्रशासन के सामने कुछ गोशाला संचालक तो मना नहीं कर पाएं जबकिजिले में एक-दो ऐसी भी गोशाला भी रही जिनके संचालकों ने प्रशासन से बेसहारा गोवंश को छोडऩे से पहले शेड का निर्माण व चारे पानी के लिए पर्याप्त आर्थिक मदद के बिना एक भी बेसहारा गोवंश रखने से मना कर दिया। अगर झज्जर जिला गोशाला संगठन के अध्यक्ष मास्टर हवा सिंह कबलाना की माने तो स्ट्रे कैटल फ्र्री अभियान के तहत प्रशासन ने झज्जर गोशााला में पिछले 7 माह में 1100 से अधिक नंदी व गाय, मातनहेल गोशााला में करीब 600 नंदी व गाय, बेरी गोशााला में करीब 125 नंदी व गाय, खेड़का गोशााला में करीब 550 नंदी, डीघल गोशााला में करीब 600 नंदी व गाय छुड़वाए। इस प्रकार पहले से ही आर्थिक मदद की आवश्यकता वाली व आवश्यकता से अधिक गोवंशों वाली इन गोशालाओं में जब प्रशासन ने बेसहारा गोवंशों को छोड़ा तो इनमें से बहुत से गोवंश को अत्यंत ही दयनीय स्थिती का सामना करना पड़ रहा है। सर्दी के मौसम में इस समय झज्जर जिले की इन गोशालाओं में प्रशासन द्वारा छोड़ा गया 1000 से ज्यादा गोवंश खुले आसमान के तले बिना शेड के खड़ा रहने को मजबूर है। इन गोशालाओं में भेजे गए बेसहारा नंदियों में कमजोर, बीमार व घायल नंदियों को स्वस्थ नंदियों के साथ ही रखा गया है। हरे चारे की व्यवस्था ठीक न होने व सर्दी में बिना शेड के रहने के कारण कमजोर व लाचार बेसहारा गोवंश के मरने की संख्या हर रोज बढ़ रही है। गोशालाओं में भेजे गये बेसहारा गोवंश की आपसी लड़ाई से हर रोज काफी गांवश गंभीर रूप से घायल भी हो रहा है । प्रशासन द्वारा बिना तैयारी के स्ट्रे कैटल फ्री अभियान चलाने का खामियाजा बेजुबान गोवंशों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। अकेले झज्जर गोशाला में भेजे गए 1100 बेसहारा गोवंश में से 300 गोवंश प्रशासन से आर्थिक मदद के अभाव में दम तोड़ चुका है। पिछले दिनों झज्जर में आयोजित पशु प्रदर्शनी में जहां पशु पालकों को करोड़ो के ईनाम मिले वहीं सरकार इन गोशालाओं में खुले में खड़े गोवंश के लिए शेड का निर्माण भी नहीं करवा सकी।
क्या कहना है झज्जर जिला गोशाला संगठन के अध्यक्ष का-इस बारे में जब झज्जर जिला गोशाला संगठन के अध्यक्ष मास्टर हवा सिंह का कहना है कि प्रशासन द्वारा स्ट्रे फ्री अभियान के तहत जिला की गोशालाओं में बिना उचित व्यवस्था किए छोड़ा गया अधिकतर गोवंश अत्यंत दयनीय स्थिती में है। करीब हजार से उपर गोवंश ऐसा है जो बिना शेड के खड़ा है, इस गोवंश के लिए हरे चारे की सख्त आवश्यकता है। प्रशासन द्वारा इन गोशालाओं में जिस समय ये बेसहारा गोवंश छोड़ा गया, उस समय जो आर्थिक मदद दी गई वह इतनी कम थी कि उस राशि से इस गोवंश को केवल एक माह तक चारा ही खिलाया जा सकता था। चह राशि इतनी नहीं थी कि इससे शेड बनाया जा सके व कई माह तक इन गोवंशों को चारा खिलाया जा सके। उन्होंने कहा कि गौ वंश संरक्षण एवं गौ संवर्धन कानून का जितना उल्लंधन झज्जर जिले में हो रहा है, उतना शायद ही किस अन्य जिले में हो रहा हो। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार बेसहारा गोवंश व गोशालाओं के गोवंश के लिए पूरी तरह आंखे मूंदे हुए है। उन्होंने कहा कि जल्द ही हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके हर गोवंश के लिए हर दिन के चारे के हिसाब से खर्र्चें की मांग की जाएगी।
