बहादुरगढ़ आज तक, विनोद कुमार
जमीन अधिग्रहण का मुद्दा किसी एक किसान या एक जिला से सम्बन्ध नहीं रखता, यह आंदोलन देशव्यापी आंदोलन है, गांव निलोठी में पांच राज्यों के किसान बैठे हुए हैं। सरकार पूरे देश में जमीन अधिग्रहण कर के टाटा, बिरला, अम्बानी, अडानी को जमीन देकर लाभांवित करना चाहती है। यह बात रमेश दलाल, अध्यक्ष भारत, भूमि बचाओ संघर्ष समिति ने गांव निलोठी में किसानों को सम्बोधित करते हुए कही।
रमेश दलाल ने गांव में लगे रक्त दान शिविर के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि इस शिविर के माध्यम से किसान यह सन्देश देना चाहते हैं कि आंदोलनकारी हमेशा मानवहित में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सभी प्रभावित परिवार ही नहीं बल्कि वे परिवार भी शामिल हैं जिनकी भूमि अधिग्रहण नहीं की जा रही, वे इसलिए शामिल हैं – ताकि जिनकी जमीन जा रही है उनको इस भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा, उनके परिवार में एक सरकारी नौकरी व भविष्य के लिए पुनर्वास मिल सके।
उन्होंने कहा कि खून का दान सबसे बड़ा दान है, मरते हुए जो व्यक्ति अंतिम सांस गिन रहा होगा उसका बचाव होगा और वे पुनः हमारे बीच में रहेगा। इस कैंप के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पाँचों प्रांतो की राज्य सरकारों व नितिन गडकरी को यह दिखाना चाहते हैं कि वे आतंकवादी नहीं, वे मानवतावादी हैं।
रमेश दलाल ने कहा कि आंदोलन के ऊपर दुनिया का इतिहास खड़ा है। भगवन शंकर, श्री कृष्ण , श्री राम सभी ने आंदोलन किए हैं। प्रधानमंत्री ने आंदोलनकारी और आन्दोलनजीवी को अलग अलग प्रभाषित किया है। प्रधानमंत्री जी से पूछा कि आज वे आंदोलन को गलत बता रहे हैं तो अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए आर एस एस व भाजपा ने भी आंन्दोलन किया और साथ में बाबा जीयों को भी जोड़ा था। आंदोलन मानवता की बुनियाद है।
उन्होने कहा कि किसानों की जमीन को लूटा जा रहा है। किसान लूटेरों से अपनी रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं। जब तक यह सृष्टि रहेगी तब तक आंदोलन का महत्व रहेगा, इसलिए संविधान सत्याग्रह आंदोलन यह दिखा रहा है कि सबसे पहले वे राष्ट्रवादी हैं क्योकि अभी तक उन्होंने कोई भी ऐसा उग्र आंदोलन नहीं किया जिस से राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया या रोड रोक कर भी नहीं बैठे, जिससे आने जाने वालों को बाधा पहुँचती हो। उन्होंने गाँधीवादी तरीके से लड़ाई लड़ी है।
इस अवसर पर विनोद मोड़ी, इंद्र सिंह, सुभाष सिंह, दरवेश हुड्डा, राजस्थान के बीकानेर से चोगा राम, हनुमानगढ़ से दलीप चप्पा, और बाड़मेर से तन सिंह आदि हजारों किसान व महिलाएं मौजूद रहे।